dr nepalwala

वस्तु क्रमांक: SCP-००२-HI

वस्तु श्रेणी: यूक्लिड

विशेष नियंत्रण प्रक्रिये: SCP-००२-HI को साइट-३६ के सामान्य नियंत्रण कक्ष में रखना है। कक्ष की निगरानी में एक हवलदार को तैनात किया जाए। महीने में एक बार MRI स्कैन में भेज जाए, खास कर की हर वर्ष २९ मई को। अगर स्कैन में कुछ भी बदलाव दिखे तो तुरंत आलाकमान को सूचित करें। कक्ष में कैमरा से हर समय निगरानी राखी जाए, अगर SCP-००२-HI किसी भी प्रकार से हिलता है तो तुरंत निगरानी बड़ा दिया जाए और दो यूनानी ऑर्थडाक्स पादरियों को कक्ष के अंदर प्रथन के लिए भेजा जाए।

अगर कभी भी संगमरमर ईवेंट शुरू होता हैं तो तुरंत ‘फटिह’ प्रोटोकॉल को लागू करे।

विवरण: SCP-००२-HI एक संगमरमर की मूर्ति जो १८२ सेन्टमीटर लंबा है। SCP-००२-HI एकदम मनुष्य के जैसा दिखता हैं। नौ कवच के अभिलेखों के अनुसार यह मूर्ति पूर्वी रोमन साम्राज्य के आखिरी सम्राट, कॉन्स्टेंटाइन ड्रगसेस पलाइलोगोस की हैं।

मूर्ति का पुरुष एक मुकुट पहना हुआ हैं, दाहिने हाथ मैं एक तलवार पकड़े हुए और एस प्रकार खड़े हुआ है जैसे को किसी पर प्रहार करने के लिए तैयार खड़े थे। जांच में बाए कंधे, पीठ किस निचले हिस्से, बाए जांघ सहित अन्य स्थानों पर गोली द्वारा चोट के निशा दिखता है पर यह प्रतीत होता है की यह मूर्ति पर लगा चोट न होकर मूर्ति में बनाया हुआ चोट हैं। मूर्ति का मुख चकित हैं जैसे की किसी कोई और कुछ एकदम से उनके सामने आ गया हो।

मूर्ति को कोई भी प्रकार की हानि नहीं पहुँच सकती हैं और न ही एन्ट्रापी का कोई प्रभाव उस पर हैं। परीक्षण में यह देखा गया हैं की SCP-००२-HI का संगमरमर दिखने मैं आम लगता हैं पर आम संगमरमर से काफी ज्यादा ठोस हैं।

SCP-००२-HI आम तौर पर अपने स्थान में खाद्य रहता हैं पर २००३ में फाउंडेशन के अंदर तीन बार अपने स्थान से थोड़े बार हिल चुका है:

  • पहले बार १२ अगस्त २००६ में, SCP-००२-HI ने अपने गर्दन को कैमरा की ओर कुछ पलों के लिए घुमाया था।
  • दूसरी बार १९ जून २००९ में SCP-००२-HI ने पाने तलवार को डॉ मेहता1 की ओर २ सेन्टमीटर पास लाए। इस के पश्चात कर्मचारियों को SCP-००२-HI से थोड़ी दूरी रखने के लिए सावधान किया गया।
  • तीसरी बार २९ मई २०१४ में SCP-००२-HI ने [डाटा सेन्सर]

SCP-००२-HI ने MRI स्कैन में एक सतर्क दिमाग की छवि दिया हैं। स्कैन में मिले छवि यह दिखती हैं की SCP-००२-HI अज्ञात कारणों से अपने आसपास के गतिविधियों का ज्ञान रखता है तथा वह अपने ओर किए गए क्रिया का को कम से कम प्रभावित होता हैं। एक टेस्ट में SCP-००२-HI पर लकड़ी के दंड से प्रहार किया गया तो मस्तक स्कैन में यह दिखा की दिमाग इस से प्रभावित हुई है, परंतु यह प्रतीत नहीं होता की SCP-००२-HI को किसी भी प्रकार का कष्ट महसूस होता हैं।

इतिहास और खोज: SCP-००२-HI का पहला जिक्र नौ कवच के दस्तावेजों में आता है। SCP-००२-HI को सबसे पहले २६ मई १५१७ में कांस्टेन्टीनोपल के गोल्डन गेट में भूमि के नीचे मिला था। सहर के यूनानी वासियों ने इसे ‘मरबेल एम्परर’ के किस्से2 से जोर दिया और दंगे शुरू होगए, जिसे सुल्तान सलीम ने ८ घंटों के बाद खतम कर दिया और १५ लोगों का सिर कलम कर दिया।

दस्तावेजों के अनुसार SCP-००२-HI ने अपने विषम गुण सबसे पहले सुल्तान के गिरफ्त में तीन दिन बाद दिखाया जब फतेह के दिन SCP-००२-HI ने, गवाहों के अनुसार, हिलकर एक जनिससरी का सिर काट दिया जो उसको तोड़ने जा रहा था। SCP-००२-HI ने फिर पूरे दिन में तीन और लोगों की हत्या की इससे पहले की उसे तोपकपी महल के कालकोठरि में बंद कर दिया गया। ३० मई को SCP-००२-HI सामान्य हालत में वापस आ गया पर फिर भी हरकत करते हुए देखा गया जिसके बाद सुल्तान ने नौ कवच को SCP-००२-HI सौप दिया। १६७८ में मिले दस्तावेज यह दिखाता है की SCP-००२-HI को मिस्र में अबू सय्यद किले में बंद कर दिया गया। दस्तावेज दिखते है की अबू सय्यद के कर्मचारियों ने SCP-००२-HI को शांत करने के काही तरीके खोजे और आखिर में यह पाया की अगर SCP-००२-HI के पास यूनानी ऑर्थडाक्स पादरियों को भेज कर प्रथन सभा किया जाए तो उसके असर को काफ़ी हद तक काम किया जा सकता हैं।

सन १९४७ में एकीकरण युद्ध के पश्चात नौ कवच के भारतीय शाखा ने SCP-००२-HI को मायापुर के नियंत्रण किले में बड़े काफिले3 के साथ भेज दिया गया परंतु बटवारे के दौरान 0th एंटी-कल्ट रेजमेन्ट के बचे हुए भागों में से एक ने काफिले पर हमला किया और उस दौरान SCP-००२-HI गायब हो गया।

फाउंडेशन को SCP-००२-HI के बारे में पहले बार २९ मई २००३ में हुआ जब ██████, राजस्थान के सरपंच को पंचायत बैठक के दौरान गाव के ‘प्राचीन मूर्ति’ ने तलवार से हत्या कर दी। राजस्थान पुलिस के अंदर के फाउंडेशन एजेंट ने साइट ३६ को सावधान किया जिसके बाद एक रिकवरी दल को गाव में भेज गया। गाव वालों से साक्षात्कार के दौरान यह जानकारी मिली थी की SCP-००२-HI को गाव में १९४७ में गाव के कुछ लोग लाए थे, यह ज्ञात नहीं है की यह कहा से मिल। गाव वालों के लिए SCP-००२-HI किसी अज्ञात राजपूत राज्य की मूर्ति थी और उससे गाव के बीचों बीच लगा दिया गया जहा ग्राम पंचायत लगता था।

SCP-००२-HI को उसके बाद हिरासत में लिया गया और गाव वालों की स्मृति हट दी गई। SCP-००२-HI को फिर साइट ३६ में भेज गया जहा अनेक परीक्षणों जिस में MRI भी शामिल था, उसे सामान्य नियंत्रण कक्ष में बंद कर दिया गया।

२००८ में नौ कवच के साथ उनके पुरालेख को साझा करने की सहमति के अंदर SCP-००२-HI से जूरी सभी जानकारी साझा की गई।

मिथक प्रष्ठभूमि: ‘मरबेल एम्परर’ मिथक का स्रोत १४५३ के कांस्टेन्टीनोपल के कब्जे से शुरू होता जिसके हिसाब से सम्राट कॉन्स्टेंटाइन शहर के बचाव में मरने वाले थे परंतु उससे पहले एक फरिश्ते ने उन्हे संगमरमर की एक मूर्ति बना दी और गोल्डन गेट में दफन दिया। मिथक के अनुसार कॉन्स्टेंटाइन उसी अवस्था में हैं, परंतु एक दिन वह वापस जगेगा और उसके बाद सभी यूनानियों को ओसमानी सुल्तानों से बचाकर रोमन साम्राज्य की पुनः स्थापना करेगा। कुछ किस्से यह भी बताते हैं की कॉन्स्टेंटाइन पूरे ईसाई समाज को एक कर जेरूसलम को इलामी देशों से वापस ले लेगा, जिसके बाद कॉन्स्टेंटाइन वापस मार जाएगा और होली सेपुलचूरे चर्च में दफन हो जाएंगे।

नौ कवच के दस्तावेजों के हिसाब से SCP-००२-HI को इसी मिथक से जोड़ा गया, यह तक की ओसमानी सुल्तानों ने काही हजार सुल्तान खर्च किए SCP-००२-HI को नियंत्रण में रखने के लिए ओसमानी सल्तनत के १९२० में गिरने तक।

परिशिष्ट-१-२०२५: संगमरमर ईवेंट

नौ कवच के एक दस्तावेज के हिसाब से सन १८४३ के २९ मई को SCP-००२-HI में बदलाव देखा गया। सुबह ८ बजे SCP-००२-HI का मूर्ति रूप एक मनुष्य रूप में बदल गया और अबू सय्यद के सिपाहियों पर हमला कर दिया। दस्तावेजों के अनुसार SCP-००२-HI ने कही नई प्रकार के गुण दिखाए जैसे को मस्तिष्क का प्रयोग कर वस्तु का हिलना, बिना किसी हमले के किसी को मार डालना आदि। दस्तावेज के हिसाब से उस दिन करीब २९ लोगों शहीद हो गए परंतु किले के कारांचारियों ने मस्किट के मदद से SCP-००२-HI को घायल कर दिया और उसे वापस एक मूर्ति बना दीया।

फाउंडेशन ने इसे संगमरमर ईवेंट नाम दिया है और इससे निपटने के लिए ‘फटिह’ प्रोटोकॉल बनाया है।

अगर संगमरमर ईवेंट फिर से होता है तो फाउंडेशन कर्मचारियों को यह आदेश है की SCP-००२-HI के खिलाफ शस्त्र का प्रयोग करें और उसे इतना घायल करें की वह वापस मूर्ति बन जाए। अगर SCP-००२-HI के खिलाफ साधारण बंदूक न काम करें तो और घटक शस्त्रों का इस्तेमाल करने के अनुमति है। अगर सब कुछ नकाम हो जाए तो अंतिम उपाय के तौर पे साइट ३६ के परमाणु बॉम्ब का प्रयोग किया जाए।

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